अपनी मेहनत से दूर की इन भारतीय क्रिकेटर्स ने गरीबी, कोई वॉचमैन रहा तो कोई था मजदूर

इरादों में यक़ीन रखिये, इरादों में जान होती है पंखो से कुछ नहीं होता, होंसलों से उड़ान होती है।

जैसे सोने की परख अग्नि करती है वैसे ही व्यक्ति की परख दुःख करता है। जो मुसीबत में हार नहीं ममानता वो ही नायक बनके उभरता है। ये वाक्य हमारे कुछ पसंदीदा क्रिकेटरो के ऊपर एकदम सही बैठते है। हमारे कुछ खिलाडी उस गरीबी से निकले हैं जहाँ सपने भी दम तोड़ देते हैं। आइये जानते है इनकी कहानी।

रविन्द्र जडेजा

भारत के बेहतरीन ऑल राउंडर 'रविन्द्र जडेजा' आज जो भी हैं अपनी मेहनत के दम पर हैं। क्या आपको है कि शुरुआती दिनों में रविन्द्र जडेजा चौकीदारी करते थे।

उमेश यादव

उमेश यादव को परिवार के ख़राब माली हालत के चलते मज़दूरी करनी पड़ी थी।

पठान बंधू

दोनों का बचपन कुछ खास नहीं बीता, बड़े होते ही दोनों अपने पिता के साथ मस्जिद की देख-रेख का काम करने लगे। हालांकि दोनों भाइयों ने मस्जिद के गलियारों को ही अपनी पिच बना लि थी और वहीं प्रैक्टिस किया करते थे।

कामरान खान, किसान से आईपीएल का सफर

18 की उम्र में कामरान ने पैसो की तंगी के चलते अपनी माँ को खो दिया था।

मनोज तिवारी

यह रेलवे स्टेशन पर काम किया करते थे और क्रिकेट की शिक्षा दिलाने के लिए घर वालों के पास पैसे नहीं थे। मनोज के बड़े भाई ने लोन लेकर क्रिकेट क्लब में मनोज का दाखिला करावाया था।

भुवनेश्वर कुमार

एक समय था जब भुवनेश्वर कुमार के पास पहनने को जूते तक नहीं थे।

मुनाफ पटेल

शुरआती दिनों में घर चलाने के लिए मुनाफ को मजदूरी का सहारा लेना पड़ा था।

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