इस गुफा में आप आज भी देख सकते हैं भगवान गणेश का कटा हुआ मानव मस्तक

हिन्दू धर्म में कोई भी नया काम शुरू करने से पहले भगवान गणेश की पूजा करना शुभ माना जाता है। गणेश भगवान आपके नए कार्य में रिद्धि-शिद्धि और तरक्की लेकर आते है। भगवान गणेश भोलेनाथ और माता पार्वती के सुपुत्र थे। इनके जन्म को लेकर कथाएं हम बचपन से सुनते आ रहे है। इन कथाओ के अनुसार गणेश जी को माता पारवती ने अपने मैल से बनाया था और उन्हें द्वारपाल बनाकर खड़ा कर दिया ताकि कोई अंदर न आ पाए। माता के आज्ञा का पालन कर रहे गणेश ने महादेव को भी अंदर आने से रोक दिया। जिससे महादेव क्रोधित हो गए और क्रोध में अपने त्रिशूल से गणेश का धड़ उनके शरीर से अलग कर दिया। ये वाक्या जानने के बाद माता बहुत क्रोधित हुयी और उनके क्रोध को दूर करने के लिए शिवजी ने गणेश जी को हाथी का सर लगा दिया।

ये कहानी तो आपने सुनी ही होगी लेकिन क्या आपने कभी सोचा हैं गणेश जी का वो पुराना मस्तक कहां गया? ये जानने के लिए पढ़े आगे

क्या आपने कभी सुना है पाताल भुवनेश्वर गुफा के बारे में?

पाताल भुवनेश्वर गुफा उत्तराखण्ड के पिथौरागढ़ में स्थिति है। 90 फ़ीट गहरी और 160 किलोमीटर लंबी यह गुफ़ा हिन्दू आस्था का अदभुत केंद्र है।

यहाँ मिलेगा आपको गणेश जी का कटा मस्तक

इस शिलारुपी मस्तक के ऊपर भगवन शिव ने 108 पंखुड़ियों वाला एक शवाष्टक दल ब्रह्मकमल भी स्थापित किया था। इस ब्रह्मकमल से पानी की दिव्य बूंदे भगवान गणेश के इस शिलरूपी मस्तक पर पड़ती है। वहीं मुख्य बूंद आदि गणेश के मुख में गिरती हुई प्रतीत होती है।

पत्थर की बनावट बताती है कब होगा कलयुग का अंत

इस गुफा के बारे में ये भी बात प्रचलित है की यहाँ के पत्थर बता सकते है की कब होगा कलयुग का अंत। यहाँ स्थापित एक पत्थर धीरे-धीरे ऊपर उठता जा रहा है। मान्यता है की जिस दिन ये पत्थर पास बनी दिवार को छू लेगा, वो कलयुग का अंत है।

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